श्री मधुर कांत चतुर्वेदी  की  साहित्यिक यात्रा

चतुर्वेदी समाज में साहित्य, अध्यात्म और ज्ञान की समृद्ध परंपरा रही है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कवि मधुर कांत चतुर्वेदी ने अपने नवीन काव्य संग्रह शाश्वत सत्य के माध्यम से आध्यात्मिक चिंतन को काव्य रूप में प्रस्तुत किया है। इससे पूर्व उनका पहला काव्य संग्रह गीत तुम्हारे लिए भी पाठकों के बीच सराहा जा चुका है।

उनकी नवीन पुस्तक में 41 आध्यात्मिक कविताएँ जीवन, ध्यान, मौन, विपत्ति में ईश्वर की अनुभूति और भक्ति के विविध आयामों को स्पर्श करती हैं। साथ ही उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के 18 अध्यायों के प्रमुख श्लोकों को छंदमय रूप में प्रस्तुत करने का भी सराहनीय प्रयास किया है।

विशेष बात यह है कि इस पुस्तक का विमोचन 1 मार्च 2026 को नोएडा में आयोजित चतुर्वेदी समाज के होली मिलन समारोह में हुआ, जहाँ समाज के अनेक विद्वानों और साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति में इस कृति का स्वागत किया गया।

पालागन.कॉम के लिए प्रस्तुत इस विशेष बातचीत में श्री मधुर कांत चतुर्वेदी अपनी साहित्यिक यात्रा, आध्यात्मिक चिंतन, पारिवारिक पृष्ठभूमि और चतुर्वेदी समाज से अपने संबंधों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं।

पालागन। कॉम :  आपका नया काव्य संग्रह शाश्वत सत्य प्रकाशित हुआ है। सबसे पहले इसके लिए बहुत-बहुत बधाई। कृपया बताइए कि इस पुस्तक को लिखने की प्रेरणा आपको कहाँ से मिली?
मधुर चतुर्वेदी :   स्वामी अखंडानंद स्वामी( वृन्दावन) का बरसों से साहित्य पढ़ रहा हूं, एवं "गीता परिचय" गोरखपुर के गीता कोर्स से वी भी जुड़ा हूँ। घर के  वातावरण का भी असर पड़ा।  

इससे पहले आपका पहला काव्य संग्रह गीत तुम्हारे लिए भी पाठकों के बीच काफी सराहा गया था। दोनों पुस्तकों की रचना यात्रा में आपको क्या अंतर महसूस हुआ?
पहला काव्य संग्रह गीत ओर ग़ज़लों  पर आधारित था। यह पुस्तक विशुद्ध आध्यात्मिक विषयों पर कविता लिखने का प्रयास हे । श्रीमद्भागवत गीता का भी छंदमय प्रस्तुतिकरण का प्रयास किया गया है।

आपकी नई पुस्तक में मुक्ति, मौन, ध्यान, विपत्ति में भगवान, और शबरी की प्रतीक्षा जैसे आध्यात्मिक विषयों पर कविताएँ हैं। आज के व्यस्त और तनावपूर्ण जीवन में आध्यात्मिक कविता का क्या महत्व है?
आज के इस तनाव पूर्ण जीवन में आध्यात्मिक कविता , तनाव कम करने में,  दवाई का काम कर सकती हे।

आपने श्रीमद्भगवद्गीता के 1 से 18 अध्यायों के कुछ प्रमुख श्लोकों को छंदमय रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इस कार्य के दौरान आपको कौन-सी चुनौतियाँ और आध्यात्मिक अनुभूतियाँ मिलीं?
भगवद्गीता के श्लोकों को छंदमय करने में बहुत प्रयास करना पड़ा।  मेरी कविता तुकांतवादी होती हैं,श्लोकों को मीटर में लिखना मुश्किल रहा साथ ही यह भी ध्यान रखना पड़ा के अर्थ न बदल जाए।    

आपने अपनी पुस्तक को “आत्मा और परमात्मा के संवाद का स्वर” कहा है। क्या आप अपने व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभवों के बारे में कुछ साझा करना चाहेंगे जिन्होंने आपकी लेखनी को दिशा दी?
गीता मुख्यतः, आत्मा, परमात्मा, जीव सेवा, समता,  कर्मयोग, ज्ञानयोग एवं भक्ति योग की बात करती हैं । गीता परिचय ग्रुप से जुड़ने से भी प्रेरणा मिली। हम शरीर नहीं हैं, हम उस ईश्वर का ही एक अंश हैं ।

आपके पारिवारिक परिवेश के बारे में भी पाठक जानना चाहेंगे। आपके परिवार में साहित्य, अध्यात्म या विद्या की परंपरा किस प्रकार रही है?
हम चंद्रपुर से हैं। बाबा एवं पिता जी तहसीलदार रहें। में स्टेट बैंक में सहायक  महाप्रबंधक रहा। बचपन में ही नीरज जी, सोम ठाकुर, वीरेंद्र मिश्र, प्रकाश मिश्रा  आदि कवियों को ग्वालियर, शिवपुरी, कवि सम्मेलनों में सुनता था। मेरे चाचा जी रामकुमार चतुर्वेदी चंचल प्रख्यात कवि रहे, अतः घर पर ही साहित्यिक माहौल मिला

चतुर्वेदी समाज में शिक्षा, विद्वत्ता और सांस्कृतिक परंपराओं की एक समृद्ध धारा रही है। क्या आपको लगता है कि इस सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि ने आपकी साहित्यिक और आध्यात्मिक सोच को प्रभावित किया है?
हमारा समाज बुद्धिजीवी समाज है जिसमें बड़े बड़े कवि हुए जैसे माखन लाल चतुर्वेदी, चंचल जी,  आनंद मिश्रा, शेल चतुर्वेदी । इन कवियों ने भी कवि हृदय को प्रभावित किया। 

 

चतुर्वेदी समाज के युवा आज विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन साहित्य और आध्यात्मिक लेखन की ओर अपेक्षाकृत कम झुकाव दिखाई देता है। आप युवाओं को इस दिशा में क्या संदेश देना चाहेंगे?
यह बात सत्य हे कि आज के  युवाओ में आध्यात्मिक क्षेत्र में कम रुचि है  परंतु  अभी कुछ नए युवा इस  ओर आ रहे हैं ।

1 मार्च 2026 को नोएडा में आयोजित चतुर्वेदी समाज के होली मिलन समारोह में आपकी पुस्तक “शाश्वत सत्य” का विशेष विमोचन हुआ। उस अवसर के अनुभव और समाज के लोगों की प्रतिक्रिया के बारे में कुछ बताइए।
होली मिलन समारोह में इस किताब का बहुत जल्दवाजी में विमोचन हुआ अतः ऐसी कोई प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं हे। 

आपकी कविताओं में जीवन की क्षणभंगुरता और समय के सदुपयोग की बात बार-बार आती है। क्या यह जीवन के किसी व्यक्तिगत अनुभव से उपजी संवेदना है?
हमारे पास बहुत कम समय है,जीवन भागता जा रहा है, कल चला गया आज भी जा रहा है,अतः जीवन में जो भी अच्छा करना है तुरंत करलें।

पालागन.कॉम चतुर्वेदी समाज के परिवारों और विशेषकर गृहिणियों तथा युवाओं को जोड़ने का एक प्रयास है। आप हमारे पाठकों के लिए क्या विशेष संदेश देना चाहेंगे?
समस्त पाठकों को यही संदेश है कि अपने व्यस्तम समय में से कुछ समय स्वयं को जानने के लिए निकालें। 

अंत में, क्या हम निकट भविष्य में आपकी और भी पुस्तकें—कविता, आध्यात्मिक चिंतन या गद्य—देखने की उम्मीद कर सकते हैं?
अभी किसी नए प्रोजेक्ट पर काम करने का कुछ भी नहीं सोचा है फिर जैसी हरी इच्छा