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नाथ तेरी गति ना समुझि परै।।
पहिलें बुलाय के रास रचायौ, फिरि कहौ जाउ घरै।।
घर त्यागौ सब वसुधा त्यागी, तेरौ ही ध्यान धरै।
हम सब तौ चरनन की दासीं, रात दिना सुमिरै।।
