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मनमोहनि रिझवारि री, तेरे नैन सलौने।।
तू अलबेली आन गाँव की, अब ही आई है गौन री।।
एसों की होरी तेरे नगर में, नित नये कौतुक हौन री।।
सौंह खवाय कहत भटु तोसां, पग नहिं धरत अगौन री।।
‘दयासखी’ या ब्रज में बसि कें, नेह निभायौ है कौन री।।