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ढफ बाजै मेरो यार निकट आयौ।।
सुमन सखी मेरो नाम सुमिर कैं, मधुरे सुर गारी गायौ।।
मेरे घर के द्वार खडे़ हैं, अबीर गुलाल मारग छायौ।।
‘हरीचंद’ अब घर न रहांगी, मिलि करिहौं पिय मन भायौ।।