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म्हारौ रसिया बालम होरी रे।।
बाजत ताल मृदंग झांझ ढफ, और नगारे की जोरी रे।।
फेंट गुलाल हाथ पिचकारी, मारत भरि भरि झोरी रे।।
‘चन्द्रसखी’ भजि बालकृष्ण छवि, चिरजीवौ यह जोरी रे।।
