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व्याल यज्ञ उपवीत सुहावन, व्याल लंगोट कसोरी।
व्याल मुकट गलें व्याल विराजत, रूप विशाल बनौ री।।
शिव संग गण गिरजा संग गोरी, खेलत शिव संग होरी।
रतन जड़ित कंचन पिचकारी, तकि मारत शिव ओरी।।
अबीर गुलाल भरें सब झोरी, मलत कपोलन रोरी।
उड़त गुलाल लाल भये बादर, धुंधि छाई चहु ओरी।।
चोया चन्दन अतर अरगजा, रंग ललित वरसोरी।
रंग ढ़रकत भईं कीच बीच गिरि, ऐसो फाग मचोरी।।
बीन ताल मृदंग झाँझ ढ़प, धुनि घन घोर बजोरी।
डिमिक डिमिक डोरू में बाजत, राग फाग गायो री।।
सोवत है प्रभु शेष मंच पै, अदभुत चरित लखोरी।
हो सवार खग नायक ऊपर, गमन कियो गिर ओरी।।
गरूड़ निहार व्याल सब टरके, पशुपति नग्न रहो री।
देखि चरित्र हँसी सब बनिता, हर हरि नृत्य करो री।।
वे शुमार विस्तार जानिकें, कवि यश अल्प कथोरी।
गिरजापति सुत नाम रामपति, चरण शरण प्रभु तोरी।।