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उमड़े जोवन पर रंग न डारिए, जो मने करूं तोसौं बार-बार।।
यह विरहिन भई नींद की माती, जोवन भयो तेरे गरे को हार।।
गावे ”गुदर पिय“ वेग खबर ले, सूखे पात नहिं जुरेंगे डार।।