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प्राण अधार नंद को नन्दन, मेरे ही ढिंग सें निकसि गयौ री।।
ना हँस बोलि कहन कछु पाई, ना नैनन भरि देखि लयौ री।।
ना मैं मिली विहँसि मुख पंकज, ना फागुन मिस भेंट लयौ री।।
