Search Your Song

नैहर में दाग लग्यौ चुनरी।।
ओढ़ि चुनरिया चली मायके, लोग कहें धन कहा फूहरी।।
ना कहुँ भेंट भई रंगरिजवा, ना पमरौ धुबिया करै उजरी।।
हाट लगी है सौदा करि लेउ, मँहगा साबुन है या नगरी।।
कहत ‘कबीर’ सुनौं भाई साधो, बिन सतसंग होय ना उजरी।।